JALARAM TEMPLE,VIRPUR

                    भारत में गुजरात राज्य में राजकोट जिल्ले के वीरपुर गाव में जलाराम मंदिर हे .इस मंदिर का नाम जलाराम बापा जो की एक संत थे उसके नाम पर रखा गया हे .इस मंदिर में हर साल लाखो भक्त उनके दर्शन करने के लिए आते हे.और यहा लाखो भक्तो को दुपहर और शाम के वख्त हर रोज प्रसाद दिया जाता हे. यहाँ की विशेषता हे की यहाँ कई सालो से दान बिलकुल भी नहीं लिया जाता हे .जलाराम बापा का जन्म सन 1799 में भारत के गुजरात राज्य के राजकोट जिले के वीरपुर में कार्तिक माह के 17 वे दिन हुआ। उनके पिता का नाम प्रधान ठक्कर और माता का नाम राजबाई ठक्कर था। वे हिन्दू भगवान राम के भक्त थे।

                         जलाराम बापा 18 साल की उम्र में ही तीर्थयात्रा से वापिस आने के बाद जलाराम बापा फतेहपुर के भोज भगत के शिष्य बन गये और गुरु ने भी उन्हें शिष्य के रूप में अपना लिया। जलाराम को उनके गुरु भोजल राम ने भगवान राम के नाम का “गुरु मंत्र” भी दे रखा था। अपने गुरु के आशीर्वाद से ही उन्होंने “सदाव्रत” नामक भोजन केंद्र की शुरुवात की, जहाँ सभी साधू-संतो और जरुरतमंद लोगो को भोजन मिलता था।जलाराम बापा को शुरू से ही सांसारिक जीवन में रूचि नही थी और इसीलिए वे पिता के व्यवसाय में ध्यान देने लगे। अपना ज्यादातर समय वे तीर्थयात्रीयो की सेवा करने और साधू-संतो की सेवा करने में ही व्यतीत करते थे। बाद में कुछ समय बाद वे अपने पिता के व्यवसाय से अलग होकर अपने अंकल वालजी भाई के साथ रहने लगे।

                      जलाराम बापा हमेशा भगवान राम को प्रार्थना करते और चमत्कार हो जाता था। हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोग उनके शिष्य बन चुके थे।सन 1822 में समृद्ध मुस्लिम व्यापारी का बेटा जमाल बीमार हो गया और डॉक्टर्स ने भी उसका ईलाज करने से मना कर दिया था। उसी समय, हरजी ने जमाल को उनके अनुभव के बारे में बताया। जमाल ने अपने घर से ही प्रार्थना की के यदि उसका बेटा ठीक हो जाता है तो वह 40 गेहू की बोरियां जलाराम बापा को सदाव्रत के लिए देंगा। भगवान ने भी उसकी प्रार्थना सुन ली और उसका बेटा ठीक हो गया और फिर जमाल भी गेहू की बोरियां लेकर जलाराम बापा के दर्शन के लिए गया।

                      जलाराम बापा की मूर्ति को एक हसते हुए आदमी की तरह बनाया गया है, जिसके हाथो में एक डंडा है और जो सफ़ेद पगड़ी और सफ़ेद धोती-ककुर्ता पहनते है। जलाराम के मंदिरों में हमें उनकी मूर्ति के अलावा भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमानजी की मूर्तियाँ भी दिखाई देती है। भारत के अलावा उनके मंदिर पूर्वी अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका और न्यू ज़ीलैण्ड में भी है।हिन्दू कार्तिक माह ए शुक्ल पक्ष के सांतवे दिन को जलाराम बापा का जन्मदिन “जलाराम जयंती” के नाम से मनाया जाता है। उनका जन्मदिन दिवाली के सांतवे दिन आता है

                    आज भी जलाराम बापा की श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने पर लोगों की समस्त इच्छायें पूर्ण हो जाती है। उनके अनुभव ‘पर्चा’ नाम से जलाराम ज्योति नाम की पत्रिका में छापी जाती है। श्रद्धालुजन गुरूवार को उपवास कर अथवा अन्नदान कर बापा को पूजते हैं।

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